आज गुरुवार की दोपहर बरेली कलेक्ट्रेट परिसर मे उस समय हड़कंप मच गया जब सार्वजनिक मार्ग पर किये गए अवैध कब्जे की शिकायत लेकर अपनी पत्नी व 7 वर्षीय बच्ची के साथ पहुंचे एक व्यक्ति ने आत्मदाह करने का प्रयास किया। इस दौरान मौके पर मौजूद रहे पुलिसकर्मियो व अन्य कर्मचारियो ने सतर्कता का परिचय देते हुए खुद पर पेट्रोल छिड़क रहे परिवार को काबू किया।
पत्नी व 7 वर्षीय बच्ची के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह का प्रयास करने वाले मीरगंज थाना क्षेत्र के गाँव खमरिया सानी निवासी लाल सिंह गंगवार का आरोप है कि गाँव निवासी कुछ दबंगो ने सरकारी खड़ंजे व सार्वजनिक मार्ग पर अवैध कब्जा किया हुआ है। आरोप है कि इस अवैध कब्जे के चलते उनके परिजनो का घर से निकलना और दैनिक कार्य करना तक मुश्किल हो गया है। लाल सिंह गंगवार का कहना है कि कई बार सम्बंधित अधिकारियो से शिकायत किये जाने के बाद भी इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नही हो सका है।
लाल सिंह और उनका परिवार लंबे समय से प्रशासनिक कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। पीड़ित का कहना है कि सरकारी रास्ते को कब्जामुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, जबकि अधिकारियों की ओर से इसे आपसी विवाद और सिविल प्रकृति का मामला बताया जाता रहा है। बार-बार समझौते के बावजूद विवाद के दोबारा उभरने और समस्या के समाधान में देरी से परेशान होकर परिवार ने कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह जैसा कदम उठाने की कोशिश की। हालांकि पुलिस की तत्परता से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
लाल सिंह गंगवार द्वारा विवाद का केंद्र बताये जा रहे उक्त रास्ते का मामला सरकारी रिपोर्ट मे भी है। विवाद का केंद्र खमरिया सानी गांव का वह सरकारी रास्ता बताया जा रहा है जो मंडनपुर रोड से जुड़ता है। राजस्व विभाग की जांच में भी यह तथ्य सामने आया है कि कुछ लोगों द्वारा मार्ग पर वाहन खड़े करने, पशु बांधने और लकड़ियां डालकर रास्ते को बाधित किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले भी दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था, लेकिन बाद में स्थिति फिर से विवादित हो गई।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मामला काफी संवेदनशील है और इसे सुलझाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर पुलिस हस्तक्षेप की आवश्यकता भी महसूस की गई थी, लेकिन इसके बावजूद विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका।
आज हुई इस घटना के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर सरकारी रास्ते पर कब्जे और लंबे समय से चले आ रहे विवाद को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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