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जिला बरेली के आंवला थाना क्षेत्र से विधवा पेंशन योजना में हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि क्षेत्र निवासी एक महिला ने अपने जीवित पति को सरकारी अभिलेखों में मृत दिखाकर विधवा पेंशन प्राप्त की। इतना ही नही महिला की दो बेटियों ने भी अपने पिता को ही मृतक पति दर्शाते हुए कथित रूप से फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर पेंशन का लाभ लेना शुरू कर दिया। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपित महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है।
उक्त मामला क्षेत्रीय निवासी हसीना बेगम द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत के बाद प्रकाश में आया। हसीना बेगम द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गयी शिकायत मे बताया गया था कि मुंसिफ कोर्ट के पीछे रहने वाली अन्नी बेगम पत्नी अच्छन कहाँ व उसकी दोनो बेटियो सुवालीन और सन्नो बी ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गयी उक्त शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीएम अविनाश सिंह ने इस मामले की जाँच के आदेश दिए थे।
मामले की जाँच कराने पर पता लगा कि जिस व्यक्ति अच्छन खां को मृत दर्शाकर पेंशन ली जा रही थी, वह वास्तव में जीवित है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक अन्नी बेगम पत्नी अच्छन खां ने वर्ष 2023 में कथित रूप से फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कराकर स्वयं को विधवा बताते हुए पेंशन स्वीकृत करा ली थी। इसके कुछ समय बाद उसकी बेटियों सुवालीन और सन्नो बी ने भी उसी व्यक्ति को अपने पिता को अपना पति दर्शाते हुए अलग-अलग फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कराए और विधवा पेंशन का लाभ लेने लगीं।
मामले की पुष्टि होने के बाद जिला प्रोबेशन विभाग की ओर से कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके आधार पर 11 नवंबर 2025 को आंवला थाने में तीनों महिलाओं के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। उनसे अब तक प्राप्त की गयी पेंशन राशि की रिकवरी के आदेश भी जारी किए गए थे।
पुलिस का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद तीनों महिलाएं फरार हो गयी थीं। कल शुक्रवार को उनके वापस आने की सूचना मिलते ही देर शाम उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ के दौरान पुलिस ने दस्तावेजों और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार, सुवालीन का विवाह हो चुका है, जबकि सन्नो बी अविवाहित बताई जा रही है।
प्राथमिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होना और उसी आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना किसी संगठित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। पुलिस और प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि कहीं इस पूरे मामले में सरकारी विभागों के कुछ कर्मचारी या अन्य लोग भी शामिल तो नहीं हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच में किसी अन्य व्यक्ति या कर्मचारी की भूमिका सामने आने पर उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

