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सोमवार, फ़रवरी 16, 2026

बिजनौर/उत्तर प्रदेश - भारत -अमेरिका व्यापार समझौते पर आक्रोशित किसानो ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव, लगाए नारे, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बिजनौर के किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आज सोमवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले एकत्र हुए सैकड़ों किसानों ने इस व्यापार समझौते के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे किसानो ने प्रधानमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन भी जिलाधिकारी जसजीत कौर को सौंपा। किसानों का स्पष्ट कहना है कि इस समझौते में कृषि और पशुपालन उत्पादों को शामिल किये जाने पर देश का अन्नदाता और पशुपालक पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।


प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रधानमंत्री की पिछली अमेरिका यात्रा का स्मरण कराते हुए कहा कि उस समय भी कृषि और डेयरी उत्पादों को समझौते में शामिल करने का भारी दबाव था, लेकिन प्रधानमंत्री ने किसानों के हित में बिना समझौते के लौटने का साहसी निर्णय लिया था। संगठन ने मांग की है कि आगामी मार्च के अंतिम सप्ताह में होने वाली इंडो-अमेरिका डील में भी वही रुख बरकरार रखा जाए। संगठन के पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि देश के लगभग 87 प्रतिशत सीमांत किसान अपनी आजीविका के लिए केवल खेती पर नहीं, बल्कि पशुपालन पर निर्भर हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि आज भी देश के कई हिस्सों में दूध पानी से सस्ता बिक रहा है। अमेरिका से पाउडर मिल्क का आयात शुरू होने पर स्थानीय दूध उत्पादकों का बाजार पूरी तरह ठप हो जाएगा। यह समझौता हमारे लिए किसी आर्थिक सुनामी से कम नहीं होगा।


किसानों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि वे भारत को दोबारा व्यापारिक गुलामी की ओर नहीं बढ़ने देंगे। उन्होंने कहा कि वे कृषि प्रधान देश के हितों की अनदेखी कर ईस्ट इंडिया कंपनी के राज जैसे हालात दोबारा पैदा नहीं होने देंगे। किसानों ने संकल्प लिया कि देश के कृषि ढांचे को बचाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

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