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जिला विद्यालय निरीक्षक पीलीभीत कार्यालय से भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ कार्यालय में तैनात एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए विभाग की वित्तीय प्रणाली में सेंध लगाई और अपनी पत्नी के बैंक खाते में एक करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि ट्रांसफर कर दी। मामला खुलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी पति-पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मे हो रही इस हेराफेरी का खुलासा बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा द्वारा दी गयी एक रिपोर्ट से हुआ। बैंक प्रबंधन ने जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को सूचित किया कि कर्मचारी इल्हाम शम्सी की पत्नी अर्शी खातून के बचत खाते में करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हो रहा है। जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस प्रकरण की जाँच का कार्य सीडीओ (मुख्य विकास अधिकारी) को सौंपा दिया था। सीडीओ की विस्तृत जांच में सरकारी धन के गबन होने की पुष्टि की गयी थी। इसके साथ ही ट्रेजरी के वरिष्ठ कोषाधिकारी की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ क़ी अर्शी के खाते मे हुए सभी 21 लेनदेन सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़े थे। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल एफआईआर के निर्देश दिए है।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि अर्शी का खाता जून 2025 में खोला गया था और मात्र छह महीनों के भीतर (दिसंबर 2025 तक) इसमें कुल 1,01,95,135 रुपये का लेनदेन किया गया। यह पूरी राशि सरकारी खातों से किस्तों में ट्रांसफर की गई थी। बताया गया कि आरोपी इल्हाम शम्सी मूल रूप से जनता इंटर कॉलेज, बीसलपुर में चपरासी के पद पर तैनात था, लेकिन पिछले आठ वर्षों से वह जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के महत्वपूर्ण वित्तीय पटल का कार्य देख रहा था। इसी रसूख और पहुंच का फायदा उठाकर उसने विभाग के सिस्टम में हेरफेर की और सरकारी धन अपनी पत्नी के खाते में भेजता रहा।
प्रभारी निरीक्षक कोतवाली पीलीभीत सत्येंद्र सिंह ने बताया कि डीएम के निर्देश पर आरोपी चपरासी इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी अर्शी खातून के विरुद्ध धोखाधड़ी और सरकारी धन हड़पने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं, जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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