उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित फैक्ट्रियों के बाहर हुए हालिया बवाल के बाद अमरोहा जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर मजदूरों के प्रदर्शन की वायरल सूचनाओं के बीच आज शुक्रवार को पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा का अभेद्य घेरा तैयार कर लिया। जिले की 20 से अधिक प्रमुख फैक्ट्रियों के बाहर सुबह 6 बजे से ही करीब 1500 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया, जिससे प्रदर्शन की कोशिशें नाकाम हो गईं।
पाठको को बताना उचित होगा कि गत दो दिनों से व्हाट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया पर आज 17 अप्रैल को बड़े धरने और प्रदर्शन की खबरें वायरल हो रही थीं। पुलिस ने इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए डिजिटल निगरानी बढ़ा दी। प्रशासन ने आज शुक्रवार की सुबह 6 बजे से ही संवेदनशील मानी जाने वाली गजरौला स्थित एक दर्जन बड़ी फैक्ट्रियों सहित कुल 20 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को सुरक्षा घेरे में लिया। सुरक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक बड़ी फैक्ट्री के गेट पर 60 से 70 पुलिसकर्मी और 2 उप निरीक्षकों की तैनाती की गई थी। गजरौला औद्योगिक क्षेत्र में सीओ और उच्चाधिकारियों के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने फ्लैग मार्च कर उपद्रवियों को कड़ा संदेश दिया।
इस दौरान शुक्रवार सुबह गजरौला स्थित यूएस फूड फैक्ट्री के बाहर कुछ मजदूरों ने इकट्ठा होने की कोशिश की, जिससे हड़कंप मच गया। हालांकि, मुस्तैद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मजदूरों से संवाद किया। अधिकारियों के समझाने पर मजदूर शांत हो गए और बिना किसी हंगामे के अपने काम पर वापस लौट गए। पुलिस ने माहौल बिगाड़ने और अफवाह फैलाने के आरोप में 8 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पाठको को बताना उचित होगा कि गजरौला औद्योगिक क्षेत्र जिले का सबसे बड़ा वर्किंग हब है, जहाँ लगभग 150 छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां संचालित हैं। यहाँ जुबिलेंट, तेवा और रौनक एग्रीकल्चर जैसी इकाइयों में हजारों श्रमिक काम करते हैं। यहाँ मुख्य रूप से दवाइयों के केमिकल, ऑटो पार्ट्स, कपड़ा, आटा और प्लास्टिक उत्पादों का निर्माण होता है। इन सभी छोटी बड़ी औधोगिक इकाइयों ने लगभग 1 लाख श्रमिक कार्यरत हैं, जिनकी शिफ्ट बदलने के दौरान आज शुक्रवार को पुलिस की विशेष निगरानी रही।
अधिकारियों के अनुसार जिले की सभी 150 औद्योगिक इकाइयों पर नजर रखी जा रही है। वर्तमान में मजदूरों की ओर से वेतन या शिफ्ट को लेकर कोई लिखित विरोध सामने नहीं आया है। पुलिस की मुस्तैदी के कारण शुक्रवार को कहीं भी धरना-प्रदर्शन नहीं हो सका और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।
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