भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन टीम ने आज शनिवार को मेरठ के पल्लवपुरम थाने में तैनात एक दरोगा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। आरोपी दरोगा एक एनडीपीएस (नशीले पदार्थ) के मुकदमे में राहत दिलाने के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग कर रहा था। पुलिस अधीक्षक नगर ने आरोपी दरोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मेडिकल थाना क्षेत्र निवासी मनीष कुमार और उसकी पत्नी सीमा के खिलाफ गत 17 नवंबर 2025 को पल्लवपुरम थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मनीष का आरोप है कि पुलिस ने उसे और उसकी पत्नी को झूठा फंसाया था, जबकि उनके पास से कोई प्रतिबंधित नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। इस मामले में मनीष जेल भी जा चुका था जबकि उसकी पत्नी सीमा फरार चल रही थी।
मुकदमे की जांच कर रहे 2023 बैच के दरोगा छत्रपाल सिंह (मूल निवासी बरेली) ने इस मामले में राहत देने और पत्नी का नाम मुकदमे से निकालने के लिए मनीष से पैसे की मांग की थी। पुलिस का दबाव इतना था कि गत 27 मार्च को मनीष के घर कुर्की का नोटिस तक चस्पा कर दिया गया था।
दरोगा द्वारा की जा रही रिश्वत की मांग से परेशान होकर मनीष ने 23 अप्रैल को एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। दरोगा छत्रपाल ने आज शनिवार को मनीष को पैसे लेकर थाने बुलाया था। थाने पहुँचा मनीष तीसरी मंजिल पर स्थित दरोगा के कमरे मे पहुंचा कर 10 हजार रूपये निकालकर दे दिए। इसी दौरान मौके पर मौजूद रही एंटी करप्शन की टीम ने दरोगा को रंगे हाथ दबोच लिया। एंटी करप्शन टीम ने पकड़े गए दरोगाके हाथ धुलवाए जो नोटो पर केमिकल लगा होने के कारण गुलाबी हो गए।
गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी दरोगा को कंकरखेड़ा थाने ले गई। इंस्पेक्टर एंटी करप्शन योगेंद्र कुमार की ओर से आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोपी दरोगा को रविवार को विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
मेरठ एसपी सिटी विनायक भोसले ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि रिश्वतखोरी के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। आरोपी दरोगा छत्रपाल सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। पूरे प्रकरण की जांच सीओ दौराला को सौंपी गई है।
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