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शनिवार, फ़रवरी 21, 2026

बिजनौर/उत्तर प्रदेश - यूजीसी रेगुलेशन 2026 के खिलाफ स्वर्ण समाज का हल्लाबोल, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर दी बड़ी चेतावनी, सौंपा ज्ञापन

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यूजीसी रेगुलेशन 2026 के विरोध में हो रहे प्रदर्शन धरने थमने का नाम नही ले रहे है। इसी क्रम मे आज शनिवार को स्वर्ण समाज समन्वय समिति के बैनर तले एकत्र हुए दर्जनों कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के इस नए नियम को 'असंवैधानिक' करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया।


समिति के सदस्यों ने मीडिया से वार्ता करते हुए कहा कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 देश के सामान्य वर्ग के छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इसके विरोध में आगामी 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'यूजीसी रोलबैक महा आंदोलन' का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर से स्वर्ण समाज के लोग जुटेंगे।समिति ने अपने ज्ञापन में कई गंभीर बिंदु उठाए है। ज्ञापन मे सामान्य/अनारक्षित वर्ग को स्पष्ट विधिक और संवैधानिक सुरक्षा प्रदान किये जाने, गजट अधिसूचना की परिभाषाओं को स्पष्ट करने, झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर कठोर कार्रवाई का नियम जोड़ने, ई समीक्षा समितियों में स्वर्ण समाज के प्रतिनिधियों को शामिल किये जाने व एंटी-रैगिंग एक्ट को पुन: सख्ती से लागू  किये जाने की मांग की गयी है।


प्रदर्शन में शामिल रहे क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी सामान्य वर्ग के हितों की बात नहीं करती, यहाँ तक कि हालिया बजट में भी इस वर्ग को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। शेखावत ने प्रधानमंत्री मोदी को सीधे चेतावनी देते हुए कहा, "यदि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो हम जल्द ही सामान्य वर्ग की नई पार्टी का गठन करेंगे। यह पार्टियाँ सिर्फ वोट की भाषा समझती हैं। अगर हमारे बच्चों का भविष्य असुरक्षित है, तो हमने तय कर लिया है कि आगामी चुनावों में भाजपा का भविष्य भी असुरक्षित कर देंगे। जहाँ स्वर्ण समाज एकजुट है, वहाँ भाजपा को जमीन नहीं मिलने देंगे।


समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब वे केवल याचना नहीं करेंगे, बल्कि सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर समानता की बात करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय न होने के कारण सामान्य वर्ग का शोषण बढ़ रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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